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MP के इस संभाग मे मचा कोहराम चेक पोस्ट की आड़ मे वंशिका ग्रुप की कारस्तानी, वसूल रही गुंडाटैक्स गुर्गे मार पीट पर उतारू, इधर निर्मित आराजकता का माहौल, जनप्रतिनिधियों ने सौपा ज्ञापन कार्यवाही की मांग

नदियों में खनन का तो अब तक का यही इतिहास रहा है कि जितने खनन की अनुमति ली जाती है, उससे कई गुना ज्यादा का खनन होता है। इसके साथ आसपास के इलाके में सोन की सुनहरी रेत की आपूर्ति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना हर गरीब का अपना पक्का मकान हो पर रेत कारोबारियो ने शहडोल जिले में स्वर्णिम माने जाने वाली योजना पर पलीता लगाना शुरू कर दिया है लॉकडाउन के बाद जैसे तैसे जन जीवन पटरी पर लाने सरकार ने अंतिम छोर तक के लोगों को लाभ पहुंचाने की नियत से निर्माण कार्य को हरी झण्डी दी बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार की हालत जिले में बद से बदतर हो चली है कारण ऋण लेकर छोटे बडे ट्रक मेटाडोर, ट्रेक्टर खरीददार रेत परिवहन करने शासन की रॉयल्टी आदि का विधिवत भुगतान कर रेत आपूर्ति के लिए सड़क पर आते हैं गुंडा टैक्स 3000₹ ने इन ट्रांसपोर्ट व्यवसाईयो के माथे की लकीरें बढा दी है। जिससे रेत खदानों के तमाम चेक पोस्ट पर आराजकता का माहौल निर्मित हो रहा है साथ साथ अमजनो में शिवराज सरकार के प्रति असंतोष पैदा हो रहा है जिसका दुष्प्रभाव पडोसी जिले में होने वाले उपचुनाव पर पड सकता है जिसे शिवराज सरकार को बजाए हल्के में लेने के गंभीरता को समझते हुए अपने गोद लिए संभाग के प्रति उठते असंतोष की ज्वाला शांत हो प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।। वरना हाथ में आई  समझी जाने वाली सीट से भी हाथ धोना पड़ सकता है पढें पूरी रिपोर्ट …

 

ऑडिटोरियल डेस्क 
शहडोल बुलेटिन। जिला प्रशासन की नाक के नीचे हो रही अवैध वसूली की बानगी देखिए खौफज़दा ट्रक मालिक 3000₹ गाडी बेबस होकर गुंडाटैक्स दे रहे है  शहड़ोल मे जिस तरह से जिले की रेत खदानों के शुरु होनें से विभिन्न परिस्थितियां निर्मित हो रही है वह आमजन के लिये मुसीबत का सबब बनती जा रही है। सरकार पलायित मजदूरों को एक तरफ ज्यादा से ज्यादा रोजगार उपलब्ध करानें का वादा कर रही है और विकास कार्यों को गति देनें के लिये विभिन्न योजनायें तैयार कर रही है वहीं इन योजनाओं की संचालन में उपयोग आनें वाली वस्तुओं को लेकर जो इन दिनों चल रहा है वह सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है। हालात यह है कि रोजी रोटी के संकट से जूझ रही मजदूर निर्माण कार्यों में मजदूरी तलास रहा है लेकिन रेत के सौदागरों नें इन कार्यों में ग्रहण लगा दिया है।

 

विकास की बदलती परिभाषा…
देश व प्रदेश के मुखिया भले ही हर कोरोनाकाल से जूझते हुये तालाबंदी के बाद हर व्यक्ति को सरलता से जीवन यापन करानें के उद्देश्य से निर्माण कार्यों में तेजी लानें के साथ ही शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मसौदा तैयार किया हो, लेकिन यह जिले में कागजों तक ही सिमटता दिखाई दे रहा है । बात प्रधानमंत्री आवास की हो या ग्रामीण इलाकों में सड़क या पुलिया जैसे विभिन्न निर्माण कार्यों की इन पर रेत के मंहगाई की मार इतनी भारी पड़ती नजर आ रही है कि इनके बजट से लेकर गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा होना लाजमी है। तीन से चार हजार रुपये में मिलनें वाली रेत की कीमतों में तीन से चार गुना बढोत्तरी होनें के विकास कार्यों में यह सबसे बड़ी बाधा नजर आ रहा है।

 

असामाजिक तत्वों के जमावड़े पर सवाल…
रेत आवंटन के बाद जिले की रेत खदानों को वंशिका ग्रुप नें प्राप्त किया। माना जा रहा था इस बड़े ग्रुप के द्वारा जब जिले में खदानों को शुरु किया जायेगा तो जिले वासियों को राहत मिलेगी और रेत के अपार भण्डार का उचित मूल्य पर लोग वैध रुप से उपयोग कर सकेंगे। लेकिन ग्रुप में इन खदानों के शुरुआत से ही जो स्वरुप जिले वासियों को दिखाया है वह ना सिर्फ हताश करनें वाला है बल्कि लोग भयभीत भी है। खदानों पर और नाकों पर दर्जनों असामाजिक तत्वों की मौजूदगी ना सिर्फ ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल खडी करती नजर आ रही है बल्कि जिले में शांति व्यवस्था को लेकर कुशल प्रशासनिक महकमें के लिये मुश्किल खड़ी करती दिख रही है।

 

 

सैकडों लोगों का दखल बगैर जांच
जिले में रेत खदानों की शुरुआत से पहले इन खदानों में, नाकों में कार्य कर लोगों की सूची व उनका ट्रैक रिकार्ड प्रशासनिक महकमें के पास होना आवश्यक है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि स्थानीय स्तर से लेकर जिले के ऐसे सैकड़ों बाहरी व्यक्ति इन खदानों के संचालन में संलिप्त है जिनके बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं है। जो प्रशासन की बड़ी चूक कही जा सकती है।

 

असलहा के महारथी, गोलीकांड आरोपी..
जिले की रेत खदानों के संचालन में वंशिका ग्रुप भले ही अपनें स्तर पर व्यापार करनें की रणनीति तैयार की हो, लेकिन आमचर्चा ओं में यह बात सामनें आ रही है कि ग्रुप में जिले की खदानों का संचालन कुछ दबंगों को सौंप दिया गया है। बीते दिनों इन्हीं दबंगो द्वारा जिले की एक खदान में हवाई फायर करनें की बात भी सामनें आई थी, लेकिन अब तक सच्चाई सामनें नहीं आ सकी है।

 

अपराधियों की इंट्री नियत पर सवाल…
रेत उत्खनन नीति चाहे जो भी कहती हो लेकिन नियमों से इतर इस ग्रुप नें अपनें संचालन के शुरुआती दौर में ही प्रशासन से लेकर आमजन तक को यह संदेश दे दिया है कि उनके द्वारा रेत उत्खनन, परिवहन व विक्रय मनमर्जी की तर्ज पर किया जायेगा। जिले में चार खदानों के शुरुआत से जो तरीका इस ग्रुप द्वारा अपनाया जा रहा है, इससे ना सिर्फ आमजन की जेबें कट रही है बल्कि आनें वाले दिनों में रेत आपूर्ति को लेकर भी लोग चिंताग्रस्त है। वह अपनें निर्माण कार्य को पूरा कैसे करेंगे, इस सवाल का जवाब और महंगी रेत का विकल्प ढू़ढनें में लगे हुये हैं। तीन से चार हजार रुपये में सुगमता से मिलनें वाली रेत की कीमतें इन दिनों 9-10 हजार हो चुकी है। जिससे अब कई निर्माण कार्य रुक गये हैं। वहीं इन खदानों के समीप जिस तरह से लठैतों की फौज तैनात की गई है उससे भी लोग भयभीत है। रेत चोरी ना हो इसके लिये नाके की स्थापना की नीति तैयार की गई थी। जिन नाकों पर ठेकेदार द्वारा नियुक्ति व्यक्ति रेत परिवहन करनें वाले वाहनों की रॉयल्टी की जांच कर सकेगा ताकि यह पता लग सके कि वहां से होकर गुजरनें वाली रेत वैध है या नहीं? सूत्र बताते हैं कि ठेकेदार द्वारा इसका काम पेटी में दे दिया गया है। जो वाहनों का किसी प्रशासनिक अधिकारियों की तरह जांच- पड़ताल करते हैं साथ ही अन्य जिले की वैध रॉयल्टी होनें पर पैनाल्टी भी लगाते हैं। वाहन स्वामी इस पर आपत्ति दर्ज कराता है तो उसके साथ अभद्रता भी की जाती है। इन नाकों पर प्रशासनिक महकमें की नजर भले ही ना पड़ी हो लेकिन यहां तैनात लोगों के बारे में यदि पड़ताल की जाये तो कई ऐसे नाम सामनें आयेंगे जिनकी मौजूदगी कई बड़े सवाल खड़ी कर देगी।

 

 

अपराधी बाँट रहे परमिट, विभाग की मौन स्वीकृति ?
आपको जानकार भले ही हैरानी हो कि सरकार से ज्यादा इन दिनों रेत परिवहन कर रहे वाहनों की परमिट इन नाकों पर लगे गुर्गे जारी कर रहे हैं। रेत परिवहन कर रहे वाहनों के लिये सरकार की तरफ से भले ही खनिज परिवहन रजिस्ट्रेशन, वाहन के संपूर्ण दस्तावेज जैसे आरटीओ,ड्राइंविग लाईसेंस, फिटनेस,परमिट व बीमा जैसे दस्तावेजों के साथ वैध रॉयल्टी होना तय हो, लेकिन इन दिनों ऐसे वाहनों के दस्तावेजों की जांच आर टी ओ, पुलिस की जगह नाकों में तैनात कर्ताधर्ताओं द्वारा किया जा रहा है। रेत ठेकेदार के यह कर्ताधर्ता बकायदे इन वाहन चालकों से बदसलूकी के साथ उन्हें हिदायत देते भी नजर आते हैं। हद तो तब हो जाती है जब संपूर्ण दस्तावेजों के साथ वैध रेत यदि दूसरे जिले से परिवहन कर लायी जा रही है तो इनके नाके से ना सिर्फ निकासी वर्जित है बल्कि बकायदे तीन हजार की पैनाल्टी भी वसूल की जाती है। यदि वाहन स्वामी या खरीददार इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करता है वहां मौजूद लोग इनसे अभद्रता भी करते हैं।

 

 

जन सरोकार से दिया नाता तोड़… 
कहनें को तो वैश्विक कोरोना महामारी और लंबे लॉकडाउन के दंश से जूझ रहे हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लानें और लाखों मजदूरों के पलायन को रोजगार उपलब्ध करानें की कवायद में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रशासनिक अमला हर संभव प्रयास करनें में लगा है कि उद्योग धंधे का संचालन हो और निर्माण में गति आये। लेकिन निर्माण में प्रयुक्त की जानें वाली सामग्रियों के बेतहाशा कीमतों में हुये ईजाफे से सरकार फेल होती नजर आ रही है। हालात यह है कि ऐसे कई निर्माण कार्य हैं जो बढ़ी कीमतों की वजह से अब बंद पड़े हैं जिसका सीधा असर उन मजदूरों पर भी पड़ रहा है जिन्हें इन दिनों रोजगार की अत्यंत आवश्यकता है।

 

 

वंशिका ग्रुप की तानाशाही का प्रमाण…?
बात शहड़ोल जिले के रेत खदानों की करें तो बीते दिनों कुछ खदानों में गोली चलनें से लेकर दबंगों द्वारा अवैध वसूली की खबरें लगातार सामनें आ रही है। इन खबरों की सच्चाई का पता लगाना और उन पर समय रहते कार्यवाही करना तो प्रशासनिक महकमें का काम है लेकिन इतना जरुर है कि रेत ठेकेदार द्वारा यदि समय रहते अपनी कार्यप्रणाली पर लगाम नहीं लगाया गया तो किसी ना किसी बड़ी घटना की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। वहीं जिस तरह से रेत ठेकेदार वंशिका ग्रुप द्वारा अपनें काम में असामाजिक तत्वों को शामिल किया है उन पर भी प्रशासन को निगरानी रखनें की आवश्यकता है। वरना बडी अनहोनी, जनहानि हो सकती है।

 

 

पर्यावरण विभागीय कार्यवाही पर सवाल…

बाद के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन से ही पता चल पाएगा कि जितने खनिज, उपखनिज को निकाला जाना है व जिस जगह से निकाला जाना है। जिन तरीकों से और जिन मशीनों से निकाला जाना है, उनसे पर्यावरण को नुकसान तो नहीं हो रहा है। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन में किनारों के भूजल भंडारण पर होने वाला अंतर, किनारों का कटाव, नए भूस्खलन, भू-धंसाव, भूक्षरण के संभावित क्षेत्रों का भी उल्लेख होता है। परंतु विभाग बडे ठेकेदारों पर हाथ डालने से कतराता है बस विभाग मध्यमवर्गीय परिवारो पर कार्रवाई का ढिढोरा पीटता है ऋण लेकर किसी कदर संचालित कर बकायदा शासन के दिशा निर्देश का पालन करते हैं इसके विपरीत कायदे-कानून की धज्जियां उड़ाते कारोबारी इनकी जद से बाहर है। अजीब है ना।

 

जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया…..

BJP नेता मे सबसे पहले कैलाश तिवारी की तरफ से रेत ठेकेदारों के मनमानी मूल्य बृद्धि को लेकर असंतोष जाहिर किया है एवं इस बात को सूबे के मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का काम किया है बही शीर्ष पदों पर आसीन ऑल इज वेल का ग्रीन सिग्नल मानो दे चुके हैं।

वही दूसरा दलों में CONGRESS नेता मे जिला अध्यक्ष को छोड़ बाकी नेताओ ने अलग अलग विधानसभा क्षेत्र में रेत की कालाबजारी, मनमानी वसूली पर अंकुश लगाने की मांग की है इन नेताओं मे शेख रब्बानी ने संभागायुक्त नरेश पाल को रेत की मूल्य बृद्धि और गुंडागर्दी से वसूला जा रहा टैक्स पर नकेल लगाने की मांग की। और अध्यक्ष चुप है

मामला क्षेत्रीय है इस कारण कांग्रेस अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह चुप होगे, वरना दिल्ली भोपाल का होता तो ईट से ईट बजा दी होती रेत ठेकेदारों की वैसे सुना है कि सब अंडरस्टूट है काग्रेसी विधायक का काम विधायक भाजपा का चुप है। भाजपा कांग्रेस अध्यक्ष भाई-भाई हैं पर जो जिलें मे अलग अलग चेक पोस्ट पर लुटे जा रहे हैं और जो निर्माणाधीन घर का सपना देखने वाले लूट रहे हैं वो कौन है …. शायद मतदान के समय आने पर अपनत्व की राजनीति का हिस्सा होगे। पब्लिक एजेंडा जीरो इसलिए अपराधी जिले में हीरो…?

 

प्रशासनिक प्रतिक्रिया….

मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया कि ट्रकों से अवैध वसूली की जा रही है जिसकी जांच के लिए इंस्पेक्टर को भेजा गया है निश्चित तौर पर सही पाएं जाने पर कार्रवाई की जावेगी।

 

सुश्री फरहतजहां M/O, माइनिंग डिपार्टमेंट शहडोल मध्यप्रदेश

 

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