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नाइंसाफ़ी (1): MP की इस जेल बिल्डिंग के अंदर जिदंगी महँगी मौत सस्ती, विचाराधीन बंदी की देर रात बालकनी मे लटकी मिली लाश, महकमों में मचा हडकंप

 

 

आप जान लीजिए जेल और जेलर आधुनिक युग में अपराधियों को सुधारने की बजाएं हर तरह के अवैध संचालित सभी धंधेबाजी मे मोहरे बनाकर सुधरने नही देते तमाम कायदे कानून गिरवी रख लेते हैं जिसके एवज में आपको जेल राजशाही होटल, रिसोर्ट से कम नही लगेगा। बशर्ते आप इनके लिए काम करो बंदी से मिलने आए तो पैसा, कपडे भेजाना है तो पैसा रिहाई तो पैसा, आमद तो पैसा सरकार के संचालित इस उपक्रम में जेल का जंगल राज कुछ ऐसा हावी हो गया कि लोगों ने शहडोल के इस जेल/ खेल व्यवस्था के कसीद पढने को मजबूर हो गए। आप धंधा करों खर्च करो छूट जाओ बंद हो जाओ तो घर से बाहर घर जैसी सुविधा। इसी क्रम में मांग और आपूर्ति के खेल में एक विचाराधीन बंदी को जिन्दगी महंगी और मौत सस्ती। पढें पूरी रिपोर्ट

 

 

अनुराग त्रिपाठी 

शहडोल बुलेटिन । जिले के बुढ़ार उपजेल में गुरूवार एक विचाराधीन कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली की खबर मिली जिसके बाद जेल प्रशासन की लापरवाही, चूक पर जिले से लेकर राजधानी तक हडकंप मच गया । पुख्ता जानकारी के मुताबिक फांसी के फंदे पर झूलता जेल में कई मामले में दर्ज अपराध मे लगभग 2 महीने पूर्व स्वयं समर्पण (सरेंडर) किया। जिसके बाद ऐसा क्या हुआ मामले में की अमूमन जमानत पर रिहा होने की राह देखने वाले युवक को मौत के मुहाने पर आना पडा या किसी ने ला दिया। यह तो उच्च स्तरीय जांच के बाद ही सच सामने आ पाएगा।

 

बालकनी को जाती सीढियों तक बंदी घूमता है रेलिंग मे फांसी झूल जाता है।

 

बुढार थाना क्षेत्र में स्थित बुढ़ार उपजेल में विचाराधीन चल रहे बंदी सज्जू उर्फ साजिद खान पिता सफर अली उम्र 30 वर्ष निवासी धनपुरी वार्ड 17, संग्राम सिंह दफाई ने सुबह जेल परिसर के अंदर गमछे से फांसी का फंदा लगाकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली है। मृतक सज्जू उर्फ साजिद खान के विरुद्ध स्थानीय थाने में भादवि. की धारा 279, 337, 325 के साथ ही 307, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत आरोप के ऊपर मामला पंजीबद्ध था। जिसकी गुरूवार सुबह फंदे में लटकी लाश जेल मे मिली। फिर तो लाजिमी है जेल प्रशासन को कई प्रश्नों के उत्तर देने होंगे।

 

 

 

 

जनचर्चा के मुताबिक न्यायालय से आरोप मे निरुद्ध बंदी की जमानती प्रकिया में परिजन लगे रहे संभवतः न्यायालय से आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया जाता परंतु बदस्तूर लालफीताशाही और उगाही का प्रचलन की खातिर जेल के कायदे कानून गिरवी रख कर मनमानी की जा रही थी जेल में बंद अन्य बंदियो के अनुसार बंदी के साथ दाढी बाल पर जेल अधीक्षक की बहस हुई जिसके चलते  27 वर्षीय युवक को बैरक के बाहर दौडा-दौडा कर अधमरा छोड दिया, जिसके बंदी ने संभवतः आत्मग्लानी मे ऐसा कदम उठाया। इस बात की पुष्टि आला अधिकारियों की दखल देने और सूक्ष्मता से जाँच के बाद ही पता चल पाएगा। देखना होगा कि इस मामले में दोषी किसे करार दिया जाता है।

 

 

बेबस माँ…आखिर क्या करें बतलाइए

 

जिले के बुढ़ार उपजेल में 30 जुलाई 2020 की सुबह एक कैदी की जेल परिसर के बैरक नंबर तीन व चार के बीच बालकनी में गमछे से झूलती लाश मिली। जेल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार रूटीन के तहत सुबह चक्कर आरक्षक बंदियों की बैरक पर पहरेदारी का जायजा लेने पहुंचे तो उन्हें ही चक्कर आ गया। जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर एंबुलेंस से पहले जेल जिला प्रशासन, स्थानीय थाना पुलिस, तहसीलदार, एसडीएम को बुलवाया।

 

आखिर जेलर पर ही क्यों लग रहा है गंभीर आरोप ?

 

मामले के बाद आक्रोशित बंदी लामबंद होकर मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। जेल अधीक्षक ने सूचना प्राप्त होने के बाद इस पूरी घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों सहित स्थानीय थाने व जिला प्रशासन को दी। वहीं थाना प्रभारी बुढार महेंद्र सिंह चौहान, एसडीओपी बुढार अमन दुबे, तहसीलदार भरत सोनी बुढ़ार व एसडीएम सोहागपुर धर्मेेन्द्र मिश्रा घटना स्थल पर पहुंच गए। सभी ने जेल परिसर का मुआयना किया एवं SLR की टीम के साथ मौके पर जाकर फांसी के फंदे से शव का निरीक्षण कर पंचनामा की प्रक्रिया करवाई जा रही थी। तभी मौके पर पहुंचे अधिकारियों के सामने ही अन्य बैरकों में बंद दर्जनों कैदियों ने जेल प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाना शुरू कर दिया। कैदियों ने उपजेल बुढार के जेलर श्री कुशवाहा पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाया है।

 

छत पर लगी खिड़की से आवाज लगाते हुए बंदी जेलर मुर्दाबाद

 

वहीं उपजेल में बंद कैदियों ने इस घटना के बाद हंगामा मचा दिया। हो सकता है यह षडयंत्र का हिस्सा हो अधीक्षक की सख्ती या और भी कारण हो सकते जो आरोप अमूमन लगते रहते हैं। परंतु यहा पर वृहद स्तर पर अचंभित करने वाला सवाल यह भी है कि जेल में निरुद्ध बंदी बैरक से बाहर कैसे था। जिसके दोष के लिए भले ही प्रहरियों को निलंबित कर दिया है। न्यायोचित, विधिसंगत जेल अधीक्षक सहित चक्कर ड्यूटी में घटना दिनांक मे मौजूद प्रहरियों पर विचाराधीन बंदी की मौत पर आत्महत्या को मजबूर करने का भारतीय दंड संहिता की धारा में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

 

J L Neti मामले में बंदियों से पूछताछ…. जेलर पर मुकदमा दर्ज हो मांग

 

इधर बंदी के परिजनों ने भी हत्या की बात कहते हुये आरोप लगाया है कि जेल में निरुद्ध बंदी से फोन पर बात हुई सभी सामान्य था। लेकिन घटना की जानकारी के बाद रोते-बिलखती साबिर उर्फ सज्जू की माँ बुढार जेल पहुँची कुछ बंदियो ने घटना का वृतांत भयावहता, अत्याचार एवं शोषण के अनेकानेक निन्दनीय कृत्यों से ग्रस्त बंद कैदी की स्थिति को साझा किया। लेकिन कही न कही साबिर की फाँसी पर घिरता जेल प्रशासन बेनकाब हुआ है। सूत्रों की मानें तो जेल में जेलर समेत पदस्थ तमाम लोगों की सीडीआर खंगालने की आवश्यकता है मामले की सच्चाई सामने आ जाएंगी।

 

 

 

जानकारी लगते ही जेल प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गये। घटना की जानकारी के बाद मौके पर जेल अधीक्षक सहित, एसडीएम, एसडीओपी व तहसीलदार मौके पर पहुंच गये। संभवतः निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की जाएगी अपेक्षाकृत मृतक की माँ को इंसाफ भी मिल जाएंगा परंतु इस घटनाक्रम के बाद महकमों की साख पर बट्टा तो लगा ही दिया।

 

मध्यप्रदेश के बडे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर…

परिजनों का गंभीर आरोप…

मेरी सज्जू से बात हुई उसने बताया कि उसे बुखार है दवाई मांगने पर जेलर गाली गलौच किया है जेलर 03 दिन से दाढ़ी काटने के लिए परेशान कर रहा है मैने मना किया तो बोटी बोटी काटकर सेफ्टी टेक में फेंक दूंगा, कहता है। इसके बाद साहब इस घटना की जानकारी लगी जैसे ही जेल आकर पहुँची जेल में बंद कैदियों ने मुझे बुलाकर बताया कि सज्जू को जेल में दौडा दौडा कर मार पीटाई हुई है। साहब अन्याय हुआ नाइंसाफ़ी है कि जेल में मेरे बच्चे को मार डाला गया।

अकीलुन बी

विचाराधीन बंदी मृतक साबिर की माँ

 

प्रशासनिक प्रतिक्रिया…..

निश्चित रूप से मामले में लापरवाही हुई है मामले की जांच उपरांत दोषियों पर कार्यवाही की जाएगी।

जे.एल.नेटी, (जेल अधीक्षक)

जिला जेल शहडोल मध्यप्रदेश

शहडोल बुलेटिन का सवाल…

  • बंदी बैरक से बाहर निकाल कैसे पाया।
  • बंदी को दौडा दौडाकर मारने का सच्चाई क्या।
  • परिजनों को इंसाफ महज निलंबन से मिल गया।
  • जनप्रतिनिधियों ने मृतक परिजनों का साथ ना दिया।
  • उगाही, वसूली संबंधी लगातार मिल रही शिकायतो पर कैसी चुप्पी।
  • परिजनों द्वारा लगाए आरोपों के बावजूद नही हुआ मुकदमा दर्ज।

 इस मामले में जो भी सज्जन जानकारी साझा करना चाहता है व्हाटस्एप कीजिए 9575511705, 9893779923, 9425830963 पर। आपका नाम गोपनीय रखा जाएगा।

 

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