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माफियाराज (3): वैध ठेकेदार के अवैध रेत खनन से वन्यजीवों समेत नदियों के अस्तित्व पर गहराता संकट, मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के बावजूद वंशिका ग्रुप का जारी ताबड़तोड़ रेत खनन, सवालो के घेरे में कार्यवाही

 

 

एनजीटी के आदेशानुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक पर्यावरण संरक्षण के लिए नदियों से रेत उत्खनन प्रतिबंध है जिसे 30 जून तक ही बढाया गया था। इसके बावजूद भी नियम कायदे को ताक पर रखकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। रोजाना 03 सैकड़ा भारी वाहनों मे लोड रेत जिले ही नही प्रदेश की सीमाओं को भेदती है जिससे अब जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खडे हो रहे हैं…पढें पूरी रिपोर्ट 

 

आनंद कुमार

शहडोल बुलेटिन। वर्षाऋतु पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवो के प्राण के लिए अमृत का कार्य करती है। खेतों में लहराती हुई फसल चारों तरफ हरियाली ही हरियाली, चहु ओर पशु पक्षी अपना नया राग सुनाते है यह बहुत मनोरम दृश्य होता है और वर्षा ऋतु के कारण भयंकर गर्मी से जो राहत मिलती है उसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है जब बारिश आती हैं तो जीव जंतुओं के लिए चारे पानी का इंतजाम हो जाती है इतना ही नहीं मानव जीवन के लिए भी भू जल स्तर खेती किसानी मे जान डालने सी पृथ्वी पर ईश्वरीय चमत्कारिक व्यवस्था पर्यावरण के लिए अहम महत्व रखती हैं। इस चक्र को सतत् जारी रखने के लिए केंद्र / राज्य सरकारो की सख्ती मानसून आते ही नदियों से अवैध हो या वैध रेत खनन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा देती है। और जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों सहित जिला प्रशासन पैनी निगरानी मे आज दिनांक तक जारी वंशिका ग्रुप का अंधाधुंध रेत खनन और परिवहन दर्जनों सवाल खड़े कर दिए है।

 

 

1. रेत नीति मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के बावजूद खनन कैसें संभव।

 

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2. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का आदेश के परिप्रेक्ष्य मे परिपालन सुव्यवस्थित हो किसकी जिम्मेदारी।

 

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3. 04 खदान संचालन का नाम, बेलगाम 50 से अधिक ठीहे में गुलजार मानसून सत्र में रेत कारोबार कैसें।

 

 

4. खनिज विभाग, माइनिंग कारपोरेशन, राजस्व, पुलिस अमला को रेत खनन, परिवहन करते सैकड़ों हाइवा एवं एलपीटी की इस तादाद में लोड रेत लेकर मुख्य मार्ग से आवाजाही कर रहे हैं कानो कान खबर नही क्या पंगु बना खुफिया तंत्र बडा सवाल।

 

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5. सवाल यह भी है कि रसपुर, बोड्डिहा, भटिगवां खुर्द और भुरसी रेत खदान में मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के पूर्व वंशिका ग्रुप का रेत भंडारण क्षमता इतनी थी जो सतत् महीनों तक हाइवा, एलपीटी के सहारे प्रदेश से लगी सीमाएं भेद कर हर दिन 150 – 300 बडे ट्रक हाइवा भंडारण टीपी पर परिवहन कर रही। खनिज राजस्व को घाटा फायदा किसको।

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6. सवाल तो नदी में फंसी जब्त सानियो कंपनी की चैन माऊटिंग पोकलेन मशीन के अज्ञात लापता मालिक पर भी खडे हो रहे हैं कि मोटर साइकिल गुमी या चोरी होती तो मालिक थाने के चक्कर काटने लगता है करोडों की जब्त मशीन बिना मालिक रेत खनन को जुटी हुई थी कोई तो मालिक होगा। वही इसके उलट यहा उल्टा प्रेस नोट जारी करा दामन दागदार होने से बचाने की नाकाम कोशिश की जा रही है।

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7. सवाल यह भी है कि सवा एकड़ भूमि पर बनाई जल एवं प्रदूषण विभाग अत्रे दूसरे दिन कर्तव्यपरायण,  चौकन्ना हो सैकडों समाचार मीडिया पर ईमेज कर प्रकाशित कराना चाहता है परंतु 60 घंटों से ज्यादा नदी की धार मे फंसी जीवनदायनी चूंदी नदी का चीरहरण करती मशीन न दिखाई दी और मशीन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई को जिम्मेदार अधिकारियों की कलम न चल सकी हद्द है।

 

ऐसे कई सवालों के जवाब टीम शहडोल बुलेटिन तलाश में जुटी हुई हैं आम जनता की मदद से नदी का किनारा और जंगल को तबाह करने वाले लोगों का साथ मिला। जिसके तहत जनता और मीडिया साथ मिलकर काम कर रही हैं जल्द ही एक विशेष विडियो बुलेटिन मे खुलासा करने जा रहे हैं कि इस मानसून सत्र में कैसे वंशिका ग्रुप का कारोबार कायदे कानून की धज्जियां उड़ाते हुए किस तरह बेखौफ़ अंधाधुंध दोहन करने मे लगा है करोडों रूपये का कारोबार राजस्व की क्षति पहुँचा कर कर रहा और ये रेत परिवहन किन किन थानांतर्गत से गुजरते है वास्तविक स्थिति का जायजा लिया गया है। जबकि वर्ष 1974 को सीपीसीबी का गठन किया गया ताकि जल प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण जमीन स्तर पर प्रभावी हो चूंदी नदी मामले में विभाग को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए थी। जो हो न सकी।

वंशिका ग्रुप की प्रतिक्रिया….

वंशिका ग्रुप के मैनेजर/ लाइजनर चंदन तिवारी जी

मामले में आधिकारिक तौर पर कंपनी की प्रतिक्रिया के लिए वंशिका ग्रुप मे पदस्थ मैनजर / लाइजनर चंदन तिवारी जी से उनके मोबाइल नंबर 9479383802 पर संपर्क किया गया। आखिर मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के बावजूद खनन वंशिका ग्रुप फला-फला रेत खदानों से नदियों मे चैन माऊटिंग पोकलेन मशीन उतारी किस अनुमति से कैसे हमे बतला दीजिए। मै आपको कॉल कर बता रहा हूँ कहा गया। कुल मिलाकर उनका इस सवाल पर कोई जवाब ना मिला है ना मिलेगा।

 

More details to …..

Coming soon ….. [email protected]

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