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माफियाराज (5): 3000 की रेत 15000 हो गई पार, मानसून सत्र में हो रहा करोडों का व्यापार….कौन – कौन है सूत्रधार, बेखौफ़ खुलासा लगातार…

 

विशेष संवाददाता 
शहडोल बुलेटिन। कोरोना महामारी के इस संकट के दौर में भले ही बड़े- बडे़ उद्योग व व्यवसायी मंदी की मार झेल रहे हों, लेकिन यह कोरोना काल जिले में अपनी पैठ जमाये एक कारोबारी के लिये सुनहरी घड़ी लेकर कमाई का पीक टाईम बनता जा रहा है। जिले की अमूल्य खनिज संपदा रेत का नियम विरुद्ध लगातार उत्खनन ना सिर्फ ठेकेदार व उसके कारिंदो के लिये रोजाना लाखों की कमाई का जरिया बना हुआ है बल्कि कई ऐसे अपराधों का भी लगातार जन्म हो रहा है जो अब तक जिले में नहीं हो रहे थे। बीते दिनों वंशिका ग्रुप के आई कार्ड के साथ ही कुछ ऐसे नवयुवक ठेकेदार की मनमानी का शिकार होकर अपना कैरियर बरबाद कर चुके हैं। हालात यह है कि प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है और ठेकेदार मनमर्जी की तर्ज पर अपनें कारोबार पर लगातार चार चांद लगा रहा है।

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जिले की 29 रेत खदानों में से वैसे तो अब तक सिर्फ 04 खदानें ही ठेकेदार द्वारा शुरु की गई है, लेकिन पड़ताल में यह बात सामनें आई कि जिले में ऐसे कोई भी स्थान नहीं है जहां रेत हो और निकाली ना जा रही हो।

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हर जगह हस्ताक्षेप….
शहड़ोल जिले में रेत खदानों को लेकर किया जाना वाले काम भले ही रेत ठेकेदार नियम कायदों पर करनें की बात करते हों, लेकिन जिले में ऐसे दर्जनों स्थान हैं जो ना तो ठेकेदार के दायरे में है और ना ही रेत खदानों के रुप में खनिज अभिलेखों में,बावजूद इसके ठेकेदार के वीरों द्वारा लगातार इन स्थानों पर जाकर रेत का उत्खनन कराया जा रहा है।

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क्या ईशारे पर हो रहा काम….
नियम कायदों की अनदेखी कर मानसून सत्र में भले ही उत्खनन के लिये दर्जनों नियम बनाये गये हों लेकिन शहड़ोल जिले में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। जिले की कई ऐसी रेत खदानें है जो ठेकेदार को खनिज विभाग द्वारा आवंटित तो की गई हैं, लेकिन इन खदानों में कार्य हेतु अब तक ना समस्त दस्तावेज ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत किये जा सके हैं और ना ही कार्य करनें की विधिवत अनुमति दी गई है, बावजूद इसके इन खदानों से लगे क्षेत्र में बकायदे माइनिंग कार्पोरेशन का नाका लगाकर कार्य किया जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब पंचायत व निजी उपयोग के लिये ग्रामीणों द्वारा उपयोग के लिये ले जानें वाली रेत पर ठेकेदार के गुर्गे प्रशासनिक अमले से कार्यवाही करानें पर भी नहीं चूक रहे, जबकि दूसरी तरफ ठेकेदार के अवैध कार्यों पर अंकुश लगानें वाले जिम्मेदार शिकायतों के बाद भी चुप्पी साधे नजर आते हैं।

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Video 18

 

 

ये है सूत्रधार….

सूत्र बताते हैं कि शहड़ोल जिले की रेत खदानों के कार्य आवंटित होते ही कोरोना महामारी के इस दौर में भी जिले के बाहर से आये सैकड़ों लोगों को सौंप दी गई। जानकारी के मुताबिक रेत खदानों के संचालन को लेकर आपराधिक गतिविधियों से वास्ता रखनें वाले दर्जनों लोगों नें कमान संभाली और मनमर्जी की तर्ज पर काम शुरु कर दिया। हालात यहां तक पहुंचे कि जिले में बेखौफ अवैध रेत के काम में सैकड़ों गाडियों का जमावड़ा लग गया। प्रशासन नें थोड़ी सख्ती बरती तो अवैध परिवहन में लिप्त कुछ रेत परिवहनकर्ताओं पर कार्यवाही भी हुई लेकिन प्रशासनिक हाथ मुख्य सूत्रधार तक नहीं पहुंच सके। खास बात तो यह है कि रेत ठेकेदार नें बकायदे जिले की सीमा के अंतिम छोर ब्यौहारी से लेकर अनूपपुर जिले की सीमा बकही तक तय लोगों को जवाबदारी सौंप दी, ठेकेदारों के कर्ताधर्ताओं में शामिल उदित कटारे से इसकी शुरुआत हुई और अब मामला मुरारी कटारे, विमलेश पटेल पर आकर सिमट गई है।

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हर रोज कैसे हो रहा भण्डारण….
भण्डारण की आड़ में लगातार लाखों रुपये के रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन को लेकर जब हमनें पड़ताल की तो हमारे हांथ वीडियो, फोटो के साथ जीपीएस कैमरे से ली गई तस्वीरों नें सिद्ध कर दिया कि ठेकेदार के आगे नियम घुटनें टेक रहे हैं। जिले के ब्यौहारी क्षेत्र स्थित संजय गांधी अभ्यारण्य से होकर ना केवल ठेकेदार नें उत्खनन के लिये ना केवल रास्ता बनाया हुआ है बल्कि वर्षा ऋतु के इस समय में जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचा रहा है। शाम ढ़लते ही सैकड़ों ट्रक रेत ठेकेदार के भण्डारण स्थल में बेखौफ रोजाना लाई जा रही है, जिसकी पुष्टि भण्डारण के उन नियमों से भी हो रही है जिन पर जिम्मेदार चुप्पी साधे हुये हैं। शासन एक तरफ कोरोना महामारी के इस काल में ग्रामीण जन तक रोजगार व अन्य साधन उपलब्ध करानें की जुगत में हैं वहीं ठेकेदारों की मनमानी और रेत की आसमान छूती कीमती नें ना सिर्फ जिले के विकास पर अंकुश लगा दिया है बल्कि ऐसे सैकड़ों लोग भी प्रभावित हुये हैं जिनका निर्माण कार्यों से जीवन यापन चलता था। वहीं प्रशासनिक अनदेखी के चलते लगातार भण्डारण जारी है।

 

 

 

 

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