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माफियाराज (7): MP का यह जिला जहाँ बेअसर कार्यवाही – बेखौफ माफिया बेलगाम रेत खनन, वैध की आड़ मे अवैध NGT की अवहेलना  

इन दिनों अवैध रेत का कारोबार चरम पर है प्रदेश का शायद ही ऐसा कोई ईलाका हो जहां से अवैध रेत उत्खनन की खबरें सामनें ना आ रही हो, कम समय‌ में मोटे लाभ के लिये कई माफिया तो अपनें मूल कामों को छोड़कर अब इस व्यापार में पूरी तरह लिप्त हो गये हैं। मानसून सत्र में प्रतिबंध के बाद लगातार जिस तरह से रेत की कीमतों में ईजाफा हुआ है उससे कई लोग कम समय में मोटी कमाई कर चुके हैं, हलांकि प्रशासनिक स्तर पर अवैध रेत उत्खनन व परिवहन को रोकनें के तमाम प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन इस पर लगाम नहीं लग सका है।

 

 

अंडरकवर रिपोर्टर 
शहड़ोल बुलेटिन। प्रदेश के विभिन्न ईलाकों के साथ ही अवैध रेत उत्खनन व परिवहन का कारोबार लगातार शहड़ोल जिले में भी पैर पसार रहा है, विडंबना है कि माफिया ना सिर्फ लगातार जिले की जीवनदायनी नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं बल्कि उनके प्राकृतिक स्वरुप को इस तरह नष्ट करनें पर आमादा है जिसकी भरपाई आनें वाले कई वर्षों तक संभव नहीं हैं‌। अपनें मोटे फायदे के लिये ना सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है बल्कि जिम्मेदार भी महज खानापूर्ति करते दिखाई दे रहे हैं।
खनिज सम्पदा के अकूत भण्डार का लगातार दोहन हो रहा है। जिले की खदानें वंशिका ग्रुप को आवंटित होनें के बाद ऐसा माना जा रहा था कि जिले में आमजन को रेत की उपलब्धता ना सिर्फ कम दामों होगी बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आयेगी, लेकिन जिले वासियों के लिये महज स्वप्न जैसा साबित हो गया है। हालात यह है कि बीते सालों में जो रेत 3 से 5 हजार रुपये में आमजन को सहज रुप से उपलब्ध हो रही थी उसकी कीमत अब 10 से 15 हजार रुपये तक हो गई हैं इतना ही नहीं बेतहासा रेत की बढ़ती कीमतों की मार झेल रहे अनेक व्यापारिक और बिल्डरों नें अपना काम तक रोक दिया है जो जिले कि विकास के लिये बड़ी बाधा बनता जा रहा है।

 

 

 

वंशिका की कार्यप्रणाली पर सवाल….
शहड़ोल जिले में आनें वाले वैध रेत खदानों का कार्य वंशिका ग्रुप द्वारा करोड़ों रुपये में लिया गया है। लेकिन मानसून सत्र के पूर्व ऐसी चार रेत खदानें ही थी जिनमें वंशिका ग्रुप के द्वारा कार्य करनें की अनुमति मिल सकी, मानसून सत्र में भण्डारण प्रक्रिया को तहत ठेकेदार को रेत स्टॉक कर विक्रय करनें की अनुमति जारी की गई, लेकिन भण्डारण की आड़ में मानसून सत्र के दौरान भी लगातार अवैध रुप से उत्खनन जारी है, सूत्र बताते हैं वंशिका ग्रुप द्वारा जिले की रेत खदानों का काम मिलते ही जिले के ऐसे दर्जनों माफिया हैं जो सक्रिय हो गये और लगातार वंशिका ग्रुप के कर्ताधर्ताओं से अपनें- अपनें क्षेत्र में कार्य‌ करनें के लिये संपर्क किया जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों को मूक सहमति तो कुछ तो ऑफ द रिकार्ड अनुमति भी दे दी गई साथ ही यह कहा गया कि मानसून सत्र के बाद इस काम की विधिवत शुरुआत की जायेगी जिसके बाद कई रेत माफिया अलग- अलग क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैंऔर अवैध रेत का कारोबार बेखौफ लगातार जारी है।

 

 

दर्जनों कार्यवाही, नतीजा सिफर……
जिले की सोन, कुनुक,‌ चूंदी नदियों के साथ ही इनकी सहायक ऐसी विभिन्न नदियां है जहां रेत का अकूत भण्डार है‌। इनमें से कुछ स्थान ऐसे हैं जिनसे‌ रेत उत्खनन का ठेका वंशिका ग्रुप को मिला है। लेकिन विभिन्न ऐसे भी स्थान हैं जो सूची में शामिल नहीं है। बावजूद इसके इन स्थानों से भी रेत उत्खनन लगातार जारी है। अवैध रेत उत्खनन की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही के बावजूद इसके इनमें कमी नहीं आई, जिले में अवैध उत्खनन पर अब तक पचास से ज्यादा कार्यवाही हो चुकी हैं लेकिन रेत उत्खननकारियों पर लगाम नहीं लग सका है। रेत परिवहन में लिप्त लॉकडाउन के दौरान से अब तक ऐसे कई वाहन पकड़े गये, जिनसे अवैध रेत उत्खनन किये जानें की पुष्टि हुई लेकिन कार्यवाही की आंच महज मोटर मालिकों तक ही सीमित रह गई। बीते माह ग्राम लोढ़ी में अवैध रेत उत्खनन में लिप्त दलदल में फंसनें के बाद एक चैन माउंटिग मशीन जप्त की जा सकी। जिसके बाद भी उत्खनन नहीं रुका और महज 50 दिनों के भीतर लोढ़ी के उसी क्षेत्र से एक बार फिर खनिज अमले नें चैनमाउंटिग मशीन बीते शनिवार को जप्त की। खास बात तो यह है कि प्रशासनिक अमला अब तक अवैध रेत उत्खनन में लिप्त करोड़ों रुपये की तीन मशीनों को जप्त किया है लेकिन उन पर कोई ठोस कार्यवाही तो दूर यह मशीनें किसकी थी और किसकी शह पर इन मशीनों से रेत उत्खनन किया जा रहा था यह रहस्य बनकर कागजों तक ही सीमित हैं।

 

Video 18

 

छत्तीसगढ़ की आड़ में उत्खनन…..
रेत उत्खनन पर लगाम लगानें लेकर प्रशासनिक सख्ती के बाद रेत कारोबारियों नें नया तरीका ईजात किया और जिले की अवैध रेत को स्थानीय थानों से मिलीभगत कर कागजों में हेरफेर शुरु किया। रेत कारोबारी जिले के कई ईलाकों में मोटे दामों पर खपाई जानें वाली रेत के दस्तावेज छत्तीसगढ़ से तैयार करानें लगे। सूत्र बताते हैं जिले में छत्तीसगढ़ के दस्तावेजों से लाई जा रही रेत शहड़ोल जिले के छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कुनुक नदी को विभिन्न घाटों से लाई जा रही है। जानकारी के मुताबिक रसमोहनी से महज 35 किमी की दूरी पर कुनुक नदी के बरगंवा, पैरीबहरा, साखी जैसे विभिन्न रेत उत्खनन क्षेत्र हैं जहां मशीनों से देर शाम रेत उत्खनन कार्य शुरु कर दिया जाता है और अलसुबह विभिन्न बड़े वाहनों में रेत को बकायदे छत्तीसगढ़ के दस्तावेजों के साथ जिले के विभिन्न ईलाकों में परिवहन किया जाता है। हाल ही में इस क्षेत्र से अवैध रेत परिवहन की स्थानीय विधायक द्वारा शिकायत के बाद दो हाईवा ट्रकों भी पकड़ा गया था, जानकारी है कि टीपी के आधार पर इन ट्रकों का आवागमन जैतपुर – भाटिया मार्ग से होना था लेकिन यह ट्रक रुट‌ के विपरीत मड़सा नामक स्थान से पकडे गये, लेकिन पकड़े गये ट्रकों पर ओवरलोडिंग, खनिज परिवहन पास आदि की जांच किये बिना ही सिर्फ छत्तीसगढ़ की टीपी को आधार मानकर महज 20 घंटे बाद छोड़ दिया गया।

 

 

 

छत्तीसगढ़ की आड़, परिवहन का यह है मार्ग…….
रेत माफिया शहड़ोल और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्रों से ना सिर्फ रेत उत्खनन कर रहे हैं, बल्कि लाखों रुपये के राजस्व की भी लगातार क्षति पहुंचा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक शहड़ोल जिले के रसमोहनी ईलाके से लगे कुनुक नदी के विभिन्न क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे हैं। इन स्थानों पर ना सिर्फ अकूत रेत का भण्डार है, और यह शासन की सूची में भी शामिल नहीं है। रेत माफिया इन स्थानों से रेत उत्खनन कर अमहा- बरगंवा-भुसहा-बिडौरी के के रास्ते जैतपुर थानें के सामनें से भाटिया होते हुये सीधे बुढ़ार ला रहे हैं। वहीं जैतपुर से कमता- खम्हीडोल-चकौडिया- कर्राबंध-कंठीटोला-गिरवा से होते हुये यहां की रेत अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ तक वहीं सीधी- बनसुकली- ब्यौहारी होते हुये रीवा,सतना तक रेत छत्तीसगढ़ के जनकपुर भरतपुर के दस्तावेजों के सहारे मोटे दामों में रोजाना खपाई जा रही है।

 

 

 

कोयलांचल में भी रेत माफिया सक्रिय…..
रेत कारोबारियों का नेटवर्क सिर्फ यहीं तक सिमट कर नहीं रह गया है, जिले की आर्थिक नगरी बुढ़ार के आसपास के क्षेत्रों में भी रेत माफियाओं नें निचले स्तर के वर्दीधारियों से मिलकर इस कारोबार में लिप्त हैं। बुढ़ार के बटली, कंसेड़ व बकही ऐसे क्षेत्र हैं जहां से लगातार रेत उत्खनन जारी है‌। सूत्रों की मानें तो बुढ़ार के नामी सेठ के संरक्षण में कोयलांचल में बीते लंबे समय से अवैध कोयला और कबाड़ के कारोबार से जुडे़ बद्री पाण्डेय नामक व्यक्ति द्वारा स्थानीय स्तर पर कुछ आदतन अपराधियों के साथ मिलकर लगातार उत्खनन कराया जा रहा है। कोयलांचल क्षेत्र में रेत के कारोबार से जुड़े यह माफिया इतनें सक्रिय हैं कि इन तीनों स्थानों से पनडुब्बी व मजदूरों के सहारे नदी की धार से पूरे दिन अवैध रेत एकत्रित कराते हैं और देर शाम से ही इसका परिवहन शुरु हो जाता है। हालात यह हैं कि रेत के जुड़े यह कारोबारी बेखौफ फोन पर ना सिर्फ अपनें कारोबार की पुष्टि करते हैं बल्कि उन्हें यह कहनें में गुरेज नहीं है कि उनके इस कार्य में ऐसे लोगों का संरक्षण है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

 

 

ब्यौहारी का भी यही हाल…..
जिले के रीवा से लगे ब्यौहारी ईलाके की तस्वीर भी अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर चौकाने वाली है। इस ईलाके में बोड्डिहा रेत खदान से वंशिका ग्रुप को कार्य करनें की अनुमति प्राप्त हैं। लेकिन मानसून सत्र में प्रतिबंध के बावजूद भण्डारण की आड़‌ में लगातार इस कंपनी के कर्ताधर्ताओं द्वारा रेत उत्खनन कराया गया‌ है। रेत उत्खनन को लेकर नियमों की बात करें तो भण्डारण को लेकर यह आदेश भी जारी किये गये कि रेत ठेकेदार भण्डारित रेत का माप अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि प्रतिबंध के पूर्व एकत्रित रेत की बिक्री की जा सके और अवैध रेत उत्खनन ना हो बावजूद इसके मानसून सत्र के दौरान भी लगातार उत्खनन किया जाता रहा। जानकारी के मुताबिक ठेकेदार द्वारा समय सीमा में विभाग को भण्डारित रेत की मात्रा का पत्रक भी जमा नहीं कराया गया जिसके लिये विभाग नें संबंधित कंपनी से पत्राचार भी किया है। वहीं बीती शाम ब्यौहारी क्षेत्र में रेत परिवहन कर रहे सात वाहनों पर पुलिस नें कार्यवाही करते हुये लगभग 75 हजार रुपये जुर्माना वसूल किया है। जानकारी है कि उक्त वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ओवरलोडिंग को लेकर यह कार्यवाही की गई लेकिन इन वाहनों में खनिज परिवहन करनें हेतु कई ऐसे दस्तावेज नहीं थे जिन पर कार्यवाही किया जाना था, पर ऐसा ना होना स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते नजर आ रहा है।

 

 

 

 

दूसरे प्रदेश जा रही रेत…..
जिले में रेत को लेकर भले ही हाहाकार मचा हो, विकाश कार्य थम गये हों , कोरोना काल में अन्य प्रदेशों से पलायित मजदूरों के सामनें रोजगार का संकट गहरा रहा हो लेकिन हालात यह हैं कि जिले के विभिन्न ईलाकों के रेत कारोबारी लगातार रेत से मोटी कमाई के फेर में रीवा, सीधी, सतना के साथ ही उत्तरप्रदेश तक खपा रहे हैं।

 



 

विधायक नें भी की शिकायत…..
अवैध रेत उत्खनन को लेकर ब्यौहारी क्षेत्र से भाजपा विधायक शरद कोल नें हाल ही में कलेक्टर शहड़ोल से शिकायत की गई थी, विधायक नें शिकायत कर अपनें क्षेत्र में अवैध रेत के उत्खनन पर रोक लगानें की मांग की थी। विधायक नें आरोप लगाते हुये कहा था उत्खननकारियों द्वारा लगातार भारी वाहनों से अवैध रेत का परिवहन कराया जा रहा है जिससे उनके क्षेत्र में ना सिर्फ काफी आक्रोश है बल्कि उनके क्षेत्र की सड़के भी खराब हो रही है। वहीं इसी क्षेत्र के गोंगपा नेता तेज प्रताप सिंह नें भी इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर से शिकायत की थी।

 

 

लाखों के राजस्व का नुकसान….
जिले में अवैध रेत का कारोबार ना सिर्फ प्रशासनिक महकमें की छवि धूमिल कर रहा है बल्कि इससे लगातार लाखों रुपये के राजस्व की हानि भी हो रही है। जिले में ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां रेत का पर्याप्त भण्डार हैं लेकिन यह रेत खदानें सूची में शामिल नहीं है, इन खदानों से अवैध रेत का उत्खनन और परिवहन भले ही रेत कारोबारियों और निचले स्तर के कुछ अधिकारियों के लिये कमाई का जरिया बना हो लेकिन इससे प्रदेश को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व की क्षति हो रही है।

 

 

खतरा बन सकता है अवैध रेत उत्खनन…..
जिले में रेत‌ कारोबारियों की कार्यप्रणाली समूचे जिले में अपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है। रेत उत्खनन सेल जुड़ी पूर्व में ऐसी कई घटनायें सामनें आ चुकी हैं जो कभी भी बड़ी घटनाओं का रुप ले सकती थी, यदि समय रहते प्रशासन द्वारा अवैध रेत के इस कारोबार पर नकेल नहीं लगाया गया तो आनें वाले दिनों में किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

 

 

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