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माफियाराज (8): बदस्तूर देर रात जारी अवैध खनन दो नंबरी रेत सुबह होते ही हो जाती है एक नंबर… छत्तीसगढ़ की टीपी पर परिवहन…करोडों की कालाबाजारी….

जिले की कमान इस वक्त बेहद ही संवेदनशील अधिकारियों के हाथों मे है जिसमे कलेक्टर सत्येंद्र सिंह सुबह से देर रात तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाटस्एप पर शत प्रतिशत लोगों की समस्याओं की जानकारी लगते ही निराकरण कर समाधान की प्रक्रिया शुरू करने  मे जुटे हुए दिखाई पड़ते हैं तो वही पुलिसिया व्यवस्था पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र शुक्ला के दिशा निर्देश मे कोई परिंदा भी पर न मार पाएं। एक जिले में ही नही कई प्रदेशों का नेटवर्क नेस्तनाबूत कर जन जन का विश्वास अर्जित किया है इस ठीक उलट शहर मे लूटपाट मची है जिलें मे ही जिलेवासियो को रेत चौगुनी महंगी मिल रही है रेत की आसमान छूती कीमत पर इज़ाफा हो रहा हैं जबकि स्थानीय लोगों को रेत कम कीमत पर मिलनी चाहिए ये ठेकेदारों बेलगाम लूटेरों की तरह मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के बावजूद खनन कर रहे हैं जुलाई से अक्टूबर तक NGT की तय GUIDELINES की वंशिका ग्रुप धज्जियां उड़ा रहा है सैकडों हजारों जलीय जीव जंतुओं की हत्या हो चुकी है नदी नालो का अस्तित्व मिटाकर हर दिन 06 थानों को भेदती हुई सैकडो ट्रक, रेत तस्करी की जा रही है। कोई कुछ बोले न बोले TEAM SHAHDOL BULLETIN अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं पढें पूरी रिपोर्ट…

सिटी डेस्क

शहडोल बुलेटिन । आप जिले के जागरूक पाठकों की कई बार की मांग थी कि  रेत खनन और परिवहन से जलीय जीव जंतुओं की हत्या हो रही और नदी नालो का अस्तित्व पर खतरा मंडराने संबधित शिकायत और उस पर नाकाफी कार्यवाही के बदले तगडे मैनेजमेंट का डंका आदिवासी बाहुल्य इलाके में बजने सा लगा है जिससे प्रशासनिक दृष्टिकोण और कारवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं जानकारी के अनुसार मप्र की नदियों में सालाना करीब 62 मिलियन टन रेत का खनन होने के बाद भी यहां रेत की कमी बनी रहती है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार मप्र में हर वर्ष 49.14 मिलियन टन रेत की मांग होती है, लेकिन 39 मिलियन टन रेत की ही आपूर्ति हो पाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि 23 मिलियन टन रेत आखिर कहां जाती है। केंद्रीय सांयिकी कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 9 राज्य ऐसे हैं जहां के निर्माण उद्योग रेत की कमी का सामना कर रहे हैं। उनमें मप्र भी शामिल है। जिसके चलते शहडोल जिला माफियाओ की पहली पसंद का कारण भी यही है।

पड़ोसी राज्यों मे खप रही रेत…..

मप्र खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 1,266 रेत की खदाने हैं जिनमें खनन होता है। इनमें से 106 खदाने नर्मदा बेसिन में हैं और 1106 दूसरी नदियों में। लेकिन खनन कारोबार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रदेश की सभी 207 नदियों में रेत का अवैध खनन हो रहा है। इन नदियों से सालाना 62 मिलियन रेत निकाली जा रही है। इसमें से 23 मिलियन रेत पड़ोसी राज्यों में अवैध रूप से पहुंचाई जा रही है। सबसे अधिक रेत उत्तर प्रदेश, फिर महाराष्ट्र और राजस्थान भेजी जा रही है। इस कारण मप्र में रेत की मांग पूरी नहीं हो पा रही है या दाम बढाकर माहौल बना दिया। जिससे इलाके मे रेत के दाम आसमान छू रहे हैं गरीब घरौंदों का सपना संजोए हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की योजना का लाभ को तरसा जा रहा है। इसके ठीक उलट जिम्मेदार गांधी के फेरे में आख, कान मूंद कर देशसेवा में लगे है यहा हर दिन समस्याओं का समाधान निश्चित तौर पर पडला झाडने सी कार्यवाही किया जाना रूटीन व्यवस्था के अंतर्गत आता है। विधायक पति तो कभी विधायक खुद मोर्चा संभालते हुए खानापूर्ति से मीडिया के गलियारों में उपस्थित दर्ज करा रहे हैं।

डिमांड ज्यादा तो बढी कीमत ….

देश में निर्माण उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नदी की रेत का महत्व बढ़ता जा रहा है। रेत की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण इसकी कीमत भी स्थाई नहीं रहती है। इसलिए अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग शहरों में रेत की कीमतों में अंतर होता है। इसी का फायदा उठाने के लिए रेत की कालाबाजारी होती है। देश में मप्र की नदियों मे सोन नदी की रेत को निर्माण कार्य के लिए बेहतर माना जाता है। इसलिए इसकी डिमांड पड़ोसी राज्यों में अधिक होती है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक मध्यप्रदेश से उत्तरप्रदेश में तो सोन नदी की रेत की मुंह मांगी कीमत दी जाती है। सूत्र बताते हैं कि शहडोल जिले में पड़ोसी राज्यों में रेत की मांग की आपूर्ति करने के लिए संगठित तरीके से माफिया जुटा हुआ है।

माँग – आपूर्ति में भारी अंतर

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार देश भर में निर्माण क्षेत्र 2010 से 2016 के बीच 6 फीसदी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट से बढ़ा है। लेकिन बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त रेत नहीं है। 2017-18 में, यही क्रमशः 2019-20 में खान मंत्रालय (एमओएम) ने 14 प्रमुख रेत उत्पादक राज्यों का सर्वेक्षण किया। इसके अनुमान हरियाणा, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश को छोडकऱ बाकी सभी राज्यों में रेत की मांग और आपूर्ति में अंतर है।

 

 

 

 

व्यवस्था में खोट…

सरकार ने खान मंत्रालय के सर्वेक्षण के आधार पर रेत खनन फ्रेमवर्क शुरू किया। इस फ्रेमवर्क ने उन कारणों की पहचान की, जिनके चलते राज्य अवैध रेत खनन से निपटने में असफल रहे। 14 राज्यों में से 11 ने पिछले तीन से चार वर्षों में छूट नियमों को बदल प्रयोजनों मे लचीली व्यवस्था ला दी वही जरूरत से ज्यादा बढे बाजार मूल्य का फायदा उठाने के लिए मप्र में माफिया रेत का अवैध खनन करवाते हैं।

 

 

 

03 थानों को भेदती माफिया टोली…

इसी क्रम में मध्यप्रदेश की सीमा से बाहर कागजों में दिखा खुली मंडी खपाई जा रही रेत अवैध खनन को बढावा देकर कागजी कवच कुंडल बन छत्तीसगढ़ की मैनुअल टीपी पर धडल्ले से जैतपुर, रसमोहनी, भठिया, बुढार,  खैरहा, अर्रझुला कालोनी अंतगर्त 3 थानों को भेदती हुई रात में होने वाली सुनहरी रेत की तस्करी अब धडल्ले से दिन दहाडे वंशिका ग्रुप के कारिंदों द्वारा की जा रही है जनता को गुमराह कर नवाबी खेल खेला जा रहा है आपूर्ति स्थानीय सोन नदी समेत दर्जन से अधिक नदियों की छाती पर पोकलेन चैन माऊटिंग मशीन दहाड रही है तो दूसरी ओर सहायक नदी नालो का अस्तित्व पर गहराता संकट आगामी ग्रीष्म ऋतु में भयंकर जल संकट उत्पन्न कर सकता है। इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों को ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

 

 

बिका गया खनिज विभाग …?

मानसून सत्र में लगे प्रतिबंध के बावजूद रेत खनन नदी की धार मोडकर किया जा रहा है की जानकारी ऐसा नहीं की खनिज अमले को नही। परंतु यहा पदस्थ कर्मचारियों के साथ पत्थरबाजी की गई जान बचाकर किसी कदर विभाग के कर्मचारियों ने भागने मे बुद्धिमानी समझी लेकिन इस पत्थरबाजी की घटना के बाद पुलिस प्राथमिकी ना दर्ज किया जाने के पीछे का सच सामने आना जरूरी है। वही वंशिका ग्रुप के ठेकेदारो ने रेत खनन और परिवहन से जुडे तमाम दस्तावेजों के बगैर शहडोल आदिवासी बाहुल्य इलाके में बंदूक की धाक पर वैध ठेकेदारों ने अवैध रेत खनन और परिवहन एनजीटी के नियमों के विरुद्ध अप्रेल 2020 से सतत जारी है। इससे कहना लाजिमी है कि हो सकता है बिक गया जिले का खनिज विभाग।

 

 

 

गौरतलब हो कि इस मामले में कई राज बेपर्दा हों चुके हैं जिसमें मानसून सत्र के पूर्व का भंडारण क्षमता (पत्रक) खनिज विभाग को जमा नही किया गया जिसकी पुष्टि स्वयं खनिज अधिकारी ने की फटकार भी लगाई, कार्यवाही न हो पाई वही महीनों से जप्त लोढ़ी घाट पर अवैध रेत खनन के दौरान फंसी पोकलेन का मालिक कौन है कितनी नदी को क्षति पहुँचाई गई रेत खनन और परिवहन कर कितना राजस्व अधिरोपित किया गया, बाकी जप्त मशीन पर राजसात जैसी कार्यवाही या राजस्व वसूली का प्रकरण नही बनाया। मामूली धाराओं में पंजीबद्ध मामले और वंशिका ग्रुप पर मेहरबानी जिले भर मे चल रही अहम चर्चा का विषय है इस पर ग्रामीण इलाके से लेकर शहर की जनता जनार्दन पेशा एक्ट के तहत सामान्य कीमतों पर रेत आपूर्ति के लिए कलेक्टर शहडोल का ध्यानाकर्षण कराते हुए वंशिका ग्रुप की कार्यप्रणाली पर नकेेल कसे जाने की मांग की है।

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