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आरोप: वंशिका के खेल में राजनीतिक मेल संभव है…? रेत कारोबार कमल भागीदार…पडताल_अंधाधुंध महँगी रेत के दाम के पीछे का सच

 

विनय शुक्ला 
शहड़ोल बुलेटिन। जिले में वंशिका ग्रुप के द्वारा रेत उत्खनन का ठेका प्राप्त करनें के बाद से ही ऐसी तमाम खबरें सामनें आईं जिससे ना सिर्फ आमजन की मुश्किल बढ़ी बल्कि विभिन्न विवाद भी सामनें आये‌। बीते लगभग एक साल हो जानें को बावजूद भी ऐसी कई तस्वीरें पहले भी समानें आ चुकी है जिसनें वंशिका ग्रुप के कर्ताधर्ताओं की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़ा किये हैं। मामला महंगी रेत का हो या इस कारोबार से जुड़े तमाम नामों का कोई भी मामला वंशिका ग्रुप की कार्यप्रणाली को कटघरे में ही खड़ा नजर आ रहा है। वहीं कोरोनाकाल और लॉकडाउन के दौर में भी जिले से लगातार नियम विरुद्ध ऐसे दर्जन भर से ज्यादा मामले भी सामनें आये जिनमें वंशिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े किये, ऐसा नहीं है कि इस ग्रुप पर प्रशासनिक चाबुक नहीं चला लेकिन इन कार्यवाहियों को बावजूद नये- नये तरीकों से वंशिका ग्रुप नें अपनी कार्यशैली का स्वरुप बदल लिया।

 

 

 

राजनीतिक संरक्षण में काम की सुगबुगबुहाट…
मानसून सत्र से लेकर अब तक लगातार वंशिका ग्रुप की कार्यशैली पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं, आमजन तक रेत उचित कीमत पर रेत आपूर्ति तो दूर स्थानीय स्तर पर मारपीट से लेकर गुंडागर्दी करनें की शिकायत भी इनके कर्ताधर्ताओं के खिलाफ थानें पहुंच रही है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्यवाही अब तक नहीं हो सकी है। सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ दिनों से वंशिका के कर्ताधर्ताओं नें अपनी कार्यशैली को नया स्वरुप दिया है। जिनमें कुछ तहसीलों की रेत खदानें सफ्दपोशों को आवंटित कर दी। जानकारी के मुताबिक इन रेत खदानों का संचालन वंशिका की आड़ में स्थानीय स्तर पर बैठे कुछ सफेदपोश कर रहे हैं जो पहले से ही बढ़ी कीमतों में और ईजाफा कर खुद मुनाफा कमा रहे हैं।

 

 

तीन तहसीलों के त्रिमूर्ति….
सूत्रों की मानें तो शहड़ोल जिले की तीन तहसीलों की रेत खदानों का बकायदे वंशिका ग्रुप द्वारा आवंटन कर दिया गया है, इन खदानों से वंशिका ग्रुप नें अब अपना हाथ खींच लिया है और खदानों के कर्ताधर्ता तीन ऐसे नेताओं को सौंपकर किनारा कर लिया है जिनकी जिले में मजबूत राजनीतिक पकड़ है, जानकारी के मुताबिक गोहपारु, सोहागपुर व बुढ़ार तहसील की खदानों का बीते कुछ दिनों से इन नेताओं के संरक्षण में संचालन हो रहा है। जिनमें स्थानीय स्तर के कई लोग अपनी सहभागिता के आधार पर इसका संचालन कर रहे हैं।

 

धार मोड़ मोडकर बिगडा अस्तित्व….
खास पात तो यह है कि बुढ़ार तहसील की चाका रेत खदान में नियमों की जमकर धज्जियां उचाई जा रही है। खदान के संतालनकर्ता ना सिर्फ नदियों का धार मोड़ रेत उत्खनन पर उतारु है बल्कि नदी की बीच धार से बकायदे कच्चा रास्ता बनाकर रेत उत्खनन कर रहे हैं। पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रही एक स्वयं सेवी संगठन नें आवाज भी उठाते हुये शिकायत भी की लेकिन कोई कार्यवाही ना हो सकी, वहीं सूत्र बताते हैं कि रोजाना सैकड़ों ट्रक रेत लगातार इस रास्ते से निकाला जा रहा है जिससे स्थानीय स्तर पर किसानों को विभिन्न परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है लेकिन शिकायत के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

 

विकास कार्यों में बाधा बन रही रेत….

लॉकडाउन और कोरोना से चौपट‌‌ हुई अर्थव्यवस्था को लेकर केन्द्र, राज्य व स्थानीय स्तर पर मौजूद प्रशासनिक लगातार विकाश कार्यों को बढ़ावा देनें में प्रयासरत है, विभिन्न योजनाओं के सुचारुरुप से क्रियान्वयन और विकाश के लिये हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन रेत की बेतहाशा बढ़ी कीमतें इन विकाश कार्यों में रोड़ा अटका रही है। वहीं वंशिका ग्रुप की दोहरी ठेकेदारी नीति से इसका सीधा असर स्थानीय स्तर पर पड़ रहा है। पहले से ही महंगी रेत की कीमतें दोहरी ठेकेदारी से और बढ़ी है हालात यह है कि मेटाडोर में स्थानीय‌ स्तर पर निलनें वाली रेत की कीमत लगभग आठ हजार रुपये हैं जिसका सीधा असर आमजन की जेब पर पड़ रहा है।

 

 

एनालिसिस विथ एलिगेशन…

रेत के कारोबार में इस बार वंशिका के खेल में राजनीतिक मेल ।।। सुनकर हम भी एक-दम से भौचक्का रह गए। जिनका नाम लगातार नदियों के अस्तित्व से खिलवाड़ करने, जलीय जीवों की हत्या करने के लिए पुरजोर विरोध करते हुए लिया जा रहा है और इतना ही नहीं इन ठेकेदारों की जिम्मेदारी थी कि वैश्विक महामारी कोरोना काल में बेगारी का दंश झेल रहे मजदूरों को काम दे इसके ठीक विपरीत विशालकाय चैन माऊटिंग पोकलेन मशीन लगाकर जीवनदायनी सोन एवं जिले की शत प्रतिशत नदियों का सीना चीरकर सोन नदी की सुनहरी रेत के मुनाफा अर्जित किया। ताज्जुब की बात लगे प्रतिबंध के बावजूद खनन और यूपी तक हर दिन सैकडों बडे ट्रक हाइवा रेत आपूर्ति के लिए सड़क पर सरपट दौड़ रहे हैं जिनकी पूछ परख तो छोडिए खपत करते रहे ठेकेदारों ने विराटनगरी के लोगो से तीगुना चौगुना दाम वसूल कर लिए बेबसी मे लोग लूटते रहे और वही शासकीय योजनाओ का क्रियान्वयन की बात करे तो देश के प्रधानमंत्री मान्नीय नरेन्द्र मोदी की अभिनव योजना प्रधानमंत्री आवास योजना समेत आधा दर्जन योजना की रफ्तार रोकने का साहस जुटा लिया। कहते हैं कि सैयां भले कोतवाल तो डर कैसा। रेत दोगुनी हो गई विपक्ष शोर कर रहा है समझ में आता है आरोप प्रत्यारोप लगेंगे परंतु नाम का फायदा कहे या वंशिका की ओछी चतुराई शहडोल जिले की रेत खदान भाजपा के जिला अध्यक्ष को दी गई जानकारी वंशिका ग्रुप के जरनल मैनेजर दे रहे। समझ से परे है।

हालाकि इन सबके पीछे का सच सामने आना जरूरी है । जिसमे रेत खनन नीति अब सत्ता दल की राजनीति बिसात पर काम कर रही है जिले की जनता जनार्दन इस जनचर्चाओ पर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। दाम अधिक, बेरोजगार हाथ को काम की जगह मशीन से बेखौफ़ अंधाधुंध खनन और परिवहन जनता ने खुली आखों से देखा है। जिसे नजरअंदाज प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टिकोण नही करना चाहिए।

प्रतिक्रिया जानने शहडोल बुलेटिन का पहला सवाल मुरारी कटारे (अतुल) से

सवाल: आप वंशिका ग्रुप कंपनी के किस पद पर है।

जवाब: कुछ देर सोचने के बाद…हम जीएम है वंशिका ग्रुप के।

सवाल: आप जिले की समस्त खदानों की मॉनिटरिंग करते हैं।

जवाब: जी हाँ।

सवाल: जानकारी मिली है कि आपने कुछ तहसीलो की खदाने किसी और हाथों में सौंप दिया है। वो कौन है।

जवाब: जी दिया है जिला अध्यक्ष बीजेपी कमल प्रताप सिंह।

सवाल: रेत खनन नीति के अधीन है है ठेके पर काम और फिर ठेका।

जवाब: हाँ बिल्कुल दे सकते हैं। कोई दिक्कत नहीं।

सवाल: क्या रेत महंगी नहीं होगी इससे। आपने तो निश्चित रूप से मुनाफे में दिया होगा।

जवाब: नही पहले से रेट कम हुआ है ज्यादा पहले थी।

सवालो के जवाब के लगभग 05 मिनट 11 सेकेंड में दिया गया।

प्रतिक्रिया जानने के लिए कमल प्रताप सिंह (भाजपा जिला अध्यक्ष) से जानकारी साझा कर मामले में त्वरित जवाब दिया।।

सवाल: आपने 03 तहसील की रेत खदान वंशिका ग्रुप से ली है। मुरारी कटारे जीएम वंशिका ग्रुप का कहना है।

जवाब: नई नही नही हम क्यों लेने जाएंगे अभी बात करते हैं उनसे।

 

इस मामले में प्रतिक्रिया के लिए सवाल आजाद बहादुर सिंह काग्रेस जिला अध्यक्ष से.. वंशिका ग्रुप के कर्मियों ने शहडोल की जीवनदायनी नदियों का अस्तित्व बिगडा है साथ साथ अपराधिक घटनाओं को भी बढावा दिया है इन सभी कर्मियों का चरित्र सत्यापन कराने के साथ ही आरोप की जांच की आवश्यकता है।

इस पूरे मामले में सच क्या है गंभीर आरोप पर जांच का विषय है हालांकि इस मामले में दी प्रतिक्रिया के बाद वंशिका ग्रुप के जरनल मैनेजर द्वारा कई और आरोप प्रशासनिक, राजनैतिक एवं पत्रकार बंधुओं पर भी लगाएं और खुद बताया की साप्ताहिक, मासिक सुविधा शुल्क से लाभान्वित जिले के जिम्मेदार है। तमाम तरह की बाते और साफ छवि के तौर पर देखे जाने वाले भाजपा जिला अध्यक्ष समेत सभी को भ्रष्टाचारी कहने वाले मुरारी कटारे उर्फ अतुल कटारे की मंशा êदांव कितना कारगर साबित होता है तफ्तीश के बाद पता चलेगा।

 

 

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